Sunday, 17 February 2019

राष्ट्रीय आंदोलन में रविंद्रनाथ टैगोर की भूमिका

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राष्ट्रीय आंदोलन में रविंद्र नाथ टैगोर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई राजनीति में उनकी सक्रियता कम रही लेकिन सामाजिक सांस्कृतिक अस्तर पर उन्होंने भारत के स्वतंत्र आत्मा और अस्मिता को विश्व में पहचान दिलाने का काम स्वतंत्रता की पूरक लड़ाई लड़ी





1888 में कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेकर अपनी कविता पाठ द्वारा देश की सामाजिक दुर्दशा को दूर करने के लिए देशवासियों को मिलजुल कर कार्य करने का आवाहन किया बंग भंग विरोधी स्वदेशी आंभारतीयदोलन के दौरान स्वदेशी का प्रचार किया स्वदेश प्रेम से ओतप्रोत कई रचनाएं घड़ी तथा प्रतिक्रिया से भरे लेख लिखें अंग्रेजों की संप्रदाय वादी या विभाजन वादी नीति को विफल बनाने में उन्होंने बंग भंग दिवस को हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में दोनों धर्मों के लोगों द्वारा एक दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाने का आवाहन किया इस समय उन्होंने अमर सोनार बांग्ला की रचना की जो कालांतर में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत बना





जालियांवाला बाग हत्याकांड के बाद रविंद्र नाथ टैगोर ने अंग्रेजी राज द्वारा दी गई नाइट फूड एवं सर की उपाधि को लौटा दी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन समग्र मुक्ति का आंदोलन था इसमें शिक्षा प्रणाली तथा अर्थव्यवस्था की मुक्ति की चिंता भी मौजूद थी रविंद्र नाथ टैगोर ने या अनुभव किया कि अंग्रेजों द्वारा दी गई शिक्षा प्रणाली में त्रुटियां के कारण ही भारत में निर्धनता हीन भावना तथा आत्मविश्वास की कमी है तथा बोलपुर में अपने विचारों को साकार करने के लिए शांतिनिकेतन की स्थापना की जो आज एक प्रमुख विश्वविद्यालय के रूप में विख्यात है





उन्होंने यह भी महसूस किया कि भारत का उद्धार ग्रामों के उधर से ही होगा अत्ता उन्होंने ग्रामीण विकास की दिशा में कृषि के क्षेत्र में सहकारी प्रणाली का सूत्रपात किया तथा सरकारी कृषि को बैंक की स्थापना करके कृषक को को शोषण से मुक्त करने का प्रयास किया उन्होंने अपने नोबेल पुरस्कार की राशि कृषि को में सूदखोरों से मुक्त करने के विचार में बांट दी यह स्पष्ट रूप से स्वीकार करते थे कि बिना आर्थिक स्वतंत्रता के राजनीतिक स्वतंत्रता का कोई औचित्य नहीं है उन्होंने संगठन औद्योगिकीकरण श्रम कल्याण तथा कुटीर एवं लघु उद्योग पर छोड़ दे कर स्वास्थ्य आर्थिक विकास पर बल दिया





उन्होंने सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी रचनाएं जैसे कविता गीत कहानी उपन्यास नाटक लेखक एवं चित्रकला संगीत कला दर्शन आदि के चित्र में अपनी उपलब्धियां के द्वारा भारत की सांस्कृतिक पहचान को स्वतंत्र रूप से विश्व की शिक्षित पर स्थापित किया पर उन्होंने पुरस्कार प्राप्त हुआ तो गुलाम भारत का आत्मसम्मान शिखर पर छा चुका भारतीयों को हीन भावना से मुक्ति मिली यह सिद्ध हो गया कि भारत राजनीतिक रूप से प्राचीन ही सही मगर आत्मा अस्मिता की दृष्टि से स्वतंत्र है यद्यपि टैगोर देशभक्त एवं राष्ट्रवादी थे लेकिन उग्र राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद के विरोधी थे





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