Monday, 18 February 2019

भारत में पंचायती राज्य का उद्देश्य

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महात्मा गांधी के ग्राम राज्य के सपनों को जमीन पर उतारने शासन को निचले स्तर तक लोकतांत्रिक बनाने एवं स्थानीय लोगों की भागीदारी द्वारा स्थानीय शासन की व्यवस्था सुचारू रूप से करने और स्थानीय समस्याओं का समाधान में स्थानीय लोगों की पहल क्षमता विकसित करने के लिए अनुच्छेद 40 में पंचायती राज का प्रावधान किया गया 73वें संविधान संशोधन द्वारा इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया भारत में पंचायती राज के उद्देश्य निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट किया जा सकता है





  • भारत गांव का देश है भारत की उन्नति तभी हो सकती है गांव की उन्नति हो गांव के समग्र विकास के लिए ग्रामीण शासन व्यवस्था आवश्यक है
  • लोकतंत्र आधारभूत अवधारणा पर आधारित है शासन के प्रत्येक स्तर पर जनता अधिक से अधिक शासन संबंधी कार्यों में हाथ बटाएं तथा स्वयं पर राज्य करने का उत्तरदायित्व स्वंय वहन करें
  • शासन को निचले स्तर तक लोकतांत्रिक बनाने एवं लोकतंत्र के आधार को व्यापक बनाना जिसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्य से जिलों एवं प्रखंडों के जरिए सत्ता हस्तांतरण
  • स्थानीय समस्याओं जरूर तो अपेक्षाओं असंतोष इत्यादि के संदर्भ में स्थानीय लोगों को ही वस्तु स्थिति की सही जानकारी होती है अता स्थानीय शासन में लोगों को भागीदारी बनाना
  • स्थानीय सामाजिक समस्या का हल स्थानीय लोगों द्वारा ही हल करना स्थानीय लोगों को स्थानीय मामलों में नियोजन करने और इनका संचालन करने हेतु अवसर मुहैया कराना
  • राजनीतिक जागरूकता एवं देश के भावी नेतृत्व के लिए प्रशिक्षण समाज के कमजोर वर्गो ,महिलाओं ,दलितों ,पिछड़ों के सशक्तिकरण
  • ग्रामीण लोगों में सामुदायिकता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना
  • केंद्र एवं राज्य स्तर के मंत्रालय एवं जिला विकास विभागों को ग्रामीण मामलों की परिसीमा में लाना








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