Monday, 18 February 2019

भारत में पंचयती राज्य की विशेषताएं

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73वें संविधान संशोधन 1993 द्वारा नई पंचायती राज व्यवस्था का अस्तित्व में आई इसे संविधान के 9 में भाग में रखा गया इसकी विशेषता निम्नलिखित है





1 त्रिस्तरीय प्रणाली





ग्राम पंचायत मध्यवर्ती रानी प्रखंड स्तर पर पंचायत एवं जिला स्तर पर पंचायत का गठन किया गया





2 पंचायतों की संरचना





राज्य विधान मंडल विधि द्वारा पंचायतों के लिए उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई परंतु किसी भी स्तर पर पंचायत के प्रादेशिक क्षेत्र की जनसंख्या और पंचायत में निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या के बीच संवाद समस्त राज्य ने यथासंभव एक ही होगा





3 आरक्षण की व्यवस्था





को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण तथा आरक्षित सीटों में 1 /3 इन वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई कुल सीट का 1/3 भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होता है राज्य को आरक्षण के संबंध में व्यवस्था करने की शक्ति दी गई बिहार विधान मंडल ने पंचायत अधिनियम 2006 महिलाओं को प्रदान किया गया तथा sc ,st ,bc 1 को रोस्टर द्वारा आरक्षण का लाभ दिया गया है,





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4 चुनाव





सभी ग्रामीण व्यस्त जो मतदाता सूची में नामांकित हो ग्राम सभा के सदस्य होते हैं यही सदस्य ग्राम समिति तथा ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव करते हैं चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रक्रिया द्वारा होता है ग्राम समिति के सदस्य पंचायत समिति के सदस्यों का चुनाव करते हैं जिला पंचायत के सदस्यों के चयन में पंचायत समिति के सदस्य भाग लेते हैं पंचायत के सदस्य चुने जाने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होता है





5 अवधि





कार्यकाल 5 वर्षों का होता है किसी पंचायत के गठन के लिए निर्वाचन 5 वर्ष की अवधि के पूर्व और विघटन की तिथि से 6 माह की अवधि के अवसान से पूर्व ही करा लिया जाएगा





सदस्यता के लिए अहर्ता





राज्य विधान मंडल के निर्वाचन की अहर्ता रखने वाले पंचायत सदस्य का सदस्य होने के लिए होंगे केवल एक अंतर है 21 वर्ष की आयु का व्यक्ति भी सदस्य बनने के लिए होता है नहीं होने का प्रश्न ऐसे प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट किया जाएगा जो राज्य विधान मंडल विधि द्वारा उपबंधित करें





राज्य वित्त आयोग





प्रत्येक 5 वर्ष पर राज्यपाल द्वारा गठन किया जाता है यह योग पंचायतों के वित्तीय साधन, सहायता राशि, विभिन्न शुल्कों , को आदि पर अपना रिपोर्ट जारी करता है





राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के प्रावधान भी किया गया है जिस में राज्यपाल द्वारा नियुक्त एक राज निर्वाचन आयुक्त होगा निर्वाचन नाम वाली तैयार करने पर पंचायतों के निर्वाचन के संचालन , अधीक्षन निदेशक नियंत्रण इसमें निहित होगा राज्य निर्वाचन आयुक्त उसी प्रकार हटाया जा सकेगा जिस प्रकार उच्च न्यायालय में न्यायाधीश को हटाया जा सकता है





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