भारतीय संविधान के मूल कर्तव्य

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मूल कर्तव्य हमारे देश के मूल संविधान में भाग 3 में व्यक्ति के अधिकार थे भाग 4 में राज के कर्तव्य थे मगर 1976 से पहले नागरिकों के कर्तव्य का उल्लेख नहीं था लेकिन हमारी परंपरा संस्कृति एवं राष्ट्रीय आंदोलन में कर्तव्य पर बहुत बल दिया गया 1976 में संवैधानिक सुधारों के लिए गठित सरदार स्वर्ण सिंह समिति के सुझाव के अनुरूप 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग 4क एवं अनुच्छेद 51a में 10 मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया इसकी प्रेरणा सोवियत के संविधान से मिली पिछले दिन 86 वां संविधान संशोधन कर्तव्य जोड़ा गया परंतु वर्तमान में मौलिक कर्तव्यों की संख्या हो गई





कर्तव्य निम्नलिखित है





  • संविधान का पालन करें और उसके आदर्श हो संस्थानों राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें
  • स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले आदर्शों को हृदय में सहयोग रखें और उसका पालन करें
  • भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अच्छे रखें
  • देश की रक्षा करें और आवाहन किए जाने वाले राष्ट्र सेवा की सेवा करें
  • भारत के सभी लोग में समर सत्ता और सामान पर की भावना का निर्माण करें धर्म ,भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो का त्याग करें स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध हो
  • हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व को समझे और उसका परिक्षण करे
  • प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत झील नदी और वन्य जीव है उसका रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद और ज्ञान अर्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहे
  • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें इससे राष्ट्रीय बढ़ते हुए और उपलब्धियां की नई ऊंचाइयों को छू ले
  • माता पिता अथवा अभिभावक हो तो अपने और से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करे





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