भारतीय संविधान में लिखित मौलिक कर्तव्य का उल्लेख

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अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक है, दूसरे शब्दों में दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे है, हमारे मूल संविधान में मौलिक अधिकार का वर्णन था परन्तु मौलिक कर्त्तव्य का है ,अपितु राज्य के मौलिक कर्त्तव्य को राज्य के निति निर्देशक तत्व में जोड़ा गया ,लेकिन हमारी परम्परा ,संस्कृति एवं राष्ट्रीय आंदोलन में कर्तव्य पर बहुल बल दिया गया ,





1976 में संवैधानिक सुधारो के लिए गठित सरदार स्वर्ण सिंह समिति के सुझावो के अनुरूप 42वे संविधान संशोधन द्वारा संविधान के भाग 4 (क )एवं अनु 51 (A )में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया ,भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों को पूर्वी रुसी संविधान से प्रभावित होकर सम्मलित किया गया ,उल्लेखनीय है प्रमुख लोकतांत्रिक देश अमेरिका ,कनाडा ,फ्रांस ,जर्मनी ,ऑस्ट्रेलिया आदि के संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं किया गया है, हालाँकि जापान ने मौलिक कर्तव्य को शामिल किया गया वहीँ समाजवादी दशों ने अधिकार और मौलिक कर्तव्य को बराबर महत्व दिया है,





स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिस





1976 में स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मूल कर्तव्यो ,उनकी आवश्यकता आदि के सम्बन्ध में एक कमेटी गठित किया गया था ,संविधान में मूल कर्तव्य को अलग रूप से जोड़ने की अनुसंशा की गयी ,जिसमे बतया गया की नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रयोग के आलावा अपने कर्तव्यों को निभाना भी आना चाहिए ,केंद्र में कांग्रेस सरकार ने समिति के सिफारिशों को स्वीकार करते हुए 42 वें संविधान संविधान संशोधन 1976 द्वारा इसे संविधान के भाग 4 एवं अनु 51 A में जोड़ा गया , प्रारम्भ संविधान में कर्तव्य की संख्या 10 थी ,उस समय कांग्रेस ने घोषणा की थी की मूल संविधान में मौलिक कर्तव्यों को न जोड़ना एक ऐतिहासिक भूल थी जो काम संविधान निर्माता नहीं पाए उसे अब किया गया है,





मूल कर्तव्य की सूची





अनु 51 A के अंतर्गत नागरिकों के मूल कर्तव्य निम्नांकित है,





  1. संविधान का पालन करे ,उसके आदर्शों ,संस्थाओं ,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें
  2. स्वंत्राता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को को अपने हरद्य में सजाये रखे और उनका पालन करें
  3. भारत की एकता ,सम्प्रभुता और अखंडता की रक्षा करें कर उसे अक्षुण्य रखे।,
  4. देश की रक्षा करें और जरूरत पड़ने पर राष्ट्र की सेवा करें
  5. भारत के सभी लोगों में सभरता और सामान भातृत्व की भावना का निर्माण करें
  6. हमारी संस्कृति के गौरवशाली परम्परा का महत्व समझे और उसका परिक्षण करें
  7. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं उसका सम्बर्धन
  8. सार्वजिनक संपत्तियों की रक्षा करें व् हिंसा से दूर रहें
  9. वैधानिक दृष्टिकोण और जनार्जन की भावना का विकास कर
  10. व्यक्तिगत एवं सामूहिक गतिविधियों सभी क्षेत्रों उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत्त प्रयास जिससे देश निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ता रहें।,
  11. 6 से 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (86 वे संविधान संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया )

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