बिहार में किसान आंदोलन का वर्णन चम्पारण सत्याग्रह

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बिहार के कुछ किसान आंदोलन -





नील आंदोलन -





अंग्रेजों के शासनकाल में किसानों का पहला जुझारू एवं संगठित विद्रोह निल विद्रोह था ,यद्दपि इसकी शुरुआत बंगाल में हुयी पर शीघ्र ही यह विकृत रूप में तिनकथिया व्यवस्था के रूप में बिहार को भी अपने जड़ में अपने में लिया ,यह आंदोलन भारतीय किसानो द्वारा ब्रिटिश निल उत्पादकों के खिलाफ था,अपनी आर्थिक माँगों के सन्दर्भ में किसानों द्वारा किया जाने वाला यह एक विशाल आंदोलन था, अंग्रेज अधिकारी बंगाल तथा बिहार के जमींदारों से भूमि लेकर बिना पैसा दिए ही किसानो को निल की खेती में काम करने के लिये विवश करते थे तथा निल उत्पादकों को काफी कम मूल्य दिया जाता था ,





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विद्रोह के प्रभाव





  1. सरकार ने विद्रोह का दमन बर्बरतापूर्वक किया ,
  2. किसानो ने जमींदारों को लगान देना बंद कर दिया
  3. दीनबंधु मित्र ने नीलदर्पण के माध्यम से किसानों की दयनीय स्थिति की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया
  4. सरकार ने निल आंदोलन के उपरान्तो उनकी समस्याों से निपटने के लिए निल आयोग का गठन किया ,जिसमे यह अधिसूचना जारी किया गया की किसानों को बाध्य नहीं किया जायेगा निल की खेती के लिए




तना भगत आंदोलन





यह आंदोलन 1914 में लगान की ऊँची दर तथा चौकीदारी कर के विरुद्ध में किया गया था ,इस आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक जतरा भगत थे,तना भगत आंदोलन गाँधी जी के अहिंसावादी सिद्धांत से प्रभावी था ,इस आंदोलन में जतरा भगत के नेतृत्व में कर नहीं देंगे ,मालगुजारी नहीं देंगे ,बेगारी नहीं देंगे आदि नारों के साथ शुरू हुआ ,यह आंदोलन अपनी अहिंसक निति के कारण गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन से जुड़ गया ,





इस आंदोलन के प्रभाव से 1948 में भारत सरकार ने तना भगत रैयत एग्रीकल्चर लैंड स्टोरेशन एक्ट पारित हुआ ,यह अधिनियम अपने आप में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ तना भगत आंदोलन की व्यापकता और कुर्वानी का आइना था,





बिहार में आंदोलन के स्वरुप /प्रकृति





बिहार का आंदोलन स्वतः स्फूर्त नहीं था बल्कि यह किसानों के अंतर्गत से अंग्रेजों के प्रति घोर असंतिष्टि था, बिहार में किसान आंदोलन को गांधीजी और स्वामी सहजानंद जैसे सफल नेतृत्व सफलता की नई ऊचाई प्रदान की ,इन आंदोलनों ने बिहार के किसानो को एक नयी दिशा और प्रेरणा दी ,यद्द्पि यह आंदोलन किसान आंदोलन रूप उभरा लेकिन इसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की रुपरेखा बदल दी,





अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना 1936 वही सहजनाद सरस्वती द्वारा 1923 में बिहार में किसान सभा की स्थापना हुई





चम्पारण सत्याग्रह





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