Wednesday, 9 January 2019

संथाल विद्रोह उद्देश्य ,संथाल विद्रोह की प्रकृति

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  1. बाहरी लोगों को भगाना
  2. विदेशी प्रभाव समाप्त करना
  3. कृषि कर हेतु नए मापदंडो की प्रस्तावना
  4. स्वराज के स्वपन साकार करना
  5. न्याय एवं धर्म राज्य स्थापित करना




संथाल विद्रोह के प्रकृति





विशुद्ध देशी एवं क्षेत्रीय प्रकृति यह विद्रोह आदिवासियों जमीन ,जंगल और जीवन में बहरी हस्तक्षेप के विरुद्ध अपने आदिवासी जनजाति जीवन रक्षा के आग्रह के साथ उठ खड़ा हुआ था ,विद्रोह के दौरान औपनिवेशिक शोषण एवं शासन प्रतीकों साथ दो देशी शोषक वर्ग को निशाना बनाया गया जिनसे इनकी शिकायतें थी ,इसलिए जमींदारों एवं माहजनों पर हमले और रेलवे स्टेशन ,पुलिस थाना ,पोस्ट ऑफिस आदि औपनिवेशिक शासन प्रतीकों जलाना प्रमुख विद्रोही गतिविधियों रूप में सामने आना ,इससे इस बात का संकेत मिलता है की जनजातीय विद्रोह प्रकृति उपनिवेशवाद -विरोधी और शोषण -विरोधी थी,और इसके मूल में जनजातीय स्वतंत्रता की प्रबल भावना मौजूद थी ,इसकी प्रकृति अध् आधुनिक थी अथार्त यह अपनी मध्य युगीन प्रकृति में ही अपनी आधुनिकीकरण का आभाष देता है,





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संथाल विद्रोह के प्रति अंग्रजी प्रतिक्रिया





इस विद्रोह की उग्रता ,इसके तीव्र विस्तार और इसके हिंसक स्वरुप ने अंग्रेजी शासन इस क्षेत्र में मार्शल लो लागु करने लिए विवश किया ,मेजर बारो के नेतृत्व सेना की दस टुकडिया भेजी गई जिन्हे संथालों द्वारा परास्त कर दिया गया विद्रोह कितना उग्र एवं हिंसक था,और अंग्रेज साथ कितनी निर्ममता विद्रोह दमन किया ,इसी बात से लगाया सकता है,की दमन करवाई के दौरान 1855 ने सिंध और 1856 कान्हू सहित लगभग पंद्रह हजार संथाल मरे गए ,





इसका विद्रोह के परिणाम और महत्व दूसरा आर्टिकल में लिखा गया जो अपलोड है आप उसे देख सकते है


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