बिहार में किसान आंदोलन का करते हुए चम्पारण सत्याग्रह

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बिहार अपनी भौगोलिक स्थिति ,उपजाऊ मिटटी और अनुकूल जलवायु के कारण उच्च कृषि उपज वाले क्षेत्रों में गिना जाता रहा है, यही कारण था की ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से ही यह भू-राजस्व संग्रहण का मुख्य केंद्र था, किन्तु अंग्रेजों काअनैतिक भू -राजस्व निति और उनके समर्थक जमींदारों साहूकारों आदि के शोषण ने किसानों में अत्यधिक विरोध का भाव उत्पन्न कर दिया ,1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और स्वतंत्रता आंदोलन में तीव्रता तथा किसान आंदोलन में इनकी हिस्सेदारी से किसान आंदोलन को नाया रास्ता मिला, इसी समय भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी का पदार्पण और उनके द्वारा किसानों की समस्या को ही भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनाना किसान आंदोलन को एक नए दिशा प्रदान करने के साथ- साथ एक सफल नेतृत्व प्रदान किया





आंदोलन के प्रमुख कारण





बिहार में कृषक लगान की ऊँची दरों ,अवैध करों ,भेदभाव पूर्ण बेदखली एवं जमींदारी क्षेत्रों में बेगार जैसी बुराइयां से परास्त थे ,सरकार द्वारा नई भू -राजस्व व्यवस्था में करों का बोझ बढ़ता जा रहा था ,इसे दूर करने के लिए किसान साहूकारों के ऋण के जाल में फंसते गए ,बिहार के किसान आंदोलन के प्रमुख कारणों को निम्न रूप से देखा जा सकता है,





  1. सरकार की किसान विरोधी राजस्व निति
  2. भारतीय हस्तशिल्प के विनाश से भूमि पर अत्यधिक दवाब
  3. कृषि में विचौलियों और जमींदारों का बढ़ता अत्याचार
  4. कर वसूली में कठोरतापूर्ण व्यव्हार
  5. किसानों को नकदी फसल उपजाने के लिए बाध्य करना




बिहार में कुछ किसान आंदोलन





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