भारत में क्षेत्रीयवाद पर टिप्पणी

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भारत में क्षेत्रवाद





क्षेत्र विशेष के प्रति आग्रह रखने वाली विचारधारा को क्षेत्रवाद संज्ञा दी जाती है ,यह क्षेत्रीय हितों ,अपेक्षाओं को राष्ट्रीय हितों व् अपेक्षताओं पर वरीयता देती है, क्षेत्रवाद की अभिवयक्ति कई प्रकार से होती है-





  • क्षेत्र विशेष स्वयत्तता या पृथक राज्य या पृथक देश की मांग
  • जैसे -बोडोलैंड (असम ),विदर्भ (महाराष्ट्र ),गोरखालैंड (पश्चिम बंगाल ),तेलंगाना (आँध्रप्रदेश ),के नाम से अलग राज्य की गई
  • क्षेत्रीय भाषा -सांस्कृतिक के आरक्षण या विशेष सामाजिक आर्थिक सुविधाए की मांग क्षेत्रवाद के लिए जिम्मेदार कारणों या परिस्थितियों निम्न बिंदुओं स्पष्ट किया




अंग्रेजी राज्य की विभिन्न नीतिया -





अंग्रेजी हितों के अनुकूल असंतुलित आर्थिक विकास फुट डालो और शासन करो की नीति तहत क्षेत्र विशेष के आधार पर रेजिमेंट के गठन ,जैसे -पंजाब रेजिमेंट ,बंगाल रेजिमेंट आदि





भौगोलिक परिस्थितियां -





भारत के कई बड़े राज्यों में भौगोलिक दृष्टि से छोटे -छोटे महत्वपूर्ण क्षेत्र एक महत्वपूर्ण इकाइयां का होना ,जैसे -अविभाजित बिहार ,उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश में क्रमश ; झारखण्ड ,उत्तरांचल ,छत्तीशगढ़ ,महारष्ट्र में विदर्भ आदि ,





ऐतिहासिक -





आजादी के पूर्व पृथक राजनितिक परिस्थिति वाली कई पुराणी रियासतों को राज्यों में मिला दिया गया बाद में नई रियासतों द्वारा पृथक राज्य की मांग की गई जैसे -मैसूर द्वारा कर्णाटक से अलग होने माँग





सांस्कृतिक कारक -





भाषा-संस्कृति ,धर्म -जाती आधार पर पृथक देश या राज्य की मांग या गठन जैसे- ग्रेटर नागालैंड की माँग या गठन जैसे -नागालैंड माँग ,पंजाब राज्य की गठन ,भाषायी आधार पर उत्तर -दक्षिण संघर्ष आदि द





राजनितिक कारण -





कई क्षेत्रीय दलों की यह सोच रही है की पृथक राज्य बन जाने उसकी स्थिति बेहतर होगी जैसे -अकाली दल ,झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ,शिव सेना आदि द्वारा पृथक राज्य को बढ़ावा दिया गया





परिणाम





क्षेत्रीय दलों का निर्माण ,राजनितिक अस्थिरता ,पृथकतावाद ,समग्र आर्थिक विकास में बाधा ,राष्ट्रवादी या संवैधानिक मूल्यों का ह्रास





समाधान





  • सभी क्षेत्रों का संतुलित आर्थिक विकास
  • सभी भाषा -संस्कृति को सामान संगरक्षण एवं विकास का अवसर मिले
  • अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिंदी को थोपा न जाय बल्कि लोकतान्त्रिक तरीके से हिंदी अपनाने के लिए प्रोत्साहन
  • जनसंचार माध्यमों तथा पाठ्यकर्मो में राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्शों का प्रचार -प्रसार
  • केंद्र राज्य सम्बंद इस प्रकार विकसित राज्यों में असंतोष न उत्पन्न हो और राज्य केंद्र की अनिवार्यता को महसूस करें

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