बिहार में मुख्यमंत्री के नियुक्ति का वर्णन करे


संविधान द्वारा सरकार संसदीय व्यवस्था में राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है ,जबकि मुख्यमंत्री स्तिथि केंद्र में प्रधानमंत्री के समान होती है,दूसरे शब्दों में राज्यपाल के मुखिया होता है ,वही मुख्यमंत्री सरकार का ,





मुख्यमंत्री की नियुक्ति





संविधान मुख्यमंत्री और उसके निर्वाचन के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है ,केवल अनुच्छेद 184 में कहा गया है की राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्ति करेगा ,संसदीय व्यवस्था राज्यपाल, राज्य विधान सभा के बहुमत प्राप्त दल के नेता को ही मुख्यमंत्री नियुक्त करता है,लेकिन यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हो तो राज्यपाल ,मुख्यमंत्री नियुक्ति अपने विवेकधार इस्तेमाल कर सकता है ,ऐसी परिस्थितियों में राज्यपाल सबसे बड़े दाल या दलों समूह के नेता मुख्यमंत्री नियुक्त है और उसे एक माह के भीतर सदन विश्वाश प्राप्त करने के लिए कहता है ,





राज्यपाल अपने व्यक्तिगत फैसले द्वारा मुख्यमंत्री की नियुक्ति तय कर सकता है, जब कार्यकाल के दौरान उसकी मृत्यु हो जाये और कोई उत्तराधिकारी तय न हो ,हालाँकि नियुक्ति के पश्चात सभारूढ़ दल सामान्यतः नए नेता का चुनाव कर लेता है,और उसके राज्यपाल के पास उसके मुख्यमंत्री नियुक्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है,राज्यपालों द्वारा मुख्यमंत्री नियुक्त करने में अपने विवेकाधिकार निम्मनलिखित सिद्धांतो का विकास हुआ है,





  1. अनुमान न लगाने का सिद्धांत इसे प्रकासा सिद्धांत के नाम से जाना जाता है ,क्योंकि इस सिद्धांत का प्रयोग सर्वप्रथम केरल राज्यपाल प्रकासा द्वारा 1952 में मद्रास के चुनाव के पश्चात् किया गया था ,इस सिद्धांत के अनुसार जब आम चुनाव में किसी दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता ,तब राज्यपाल विधानसभा सबसे बड़े दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है ,
  2. अनुमान लगाने का सिद्धांत इस सिद्धांत अनुसार जब आम चुनाव में किसी भी राजनैतिक दल को विधानसभा पूर्ण बहुमत नहीं मिलता ,तब राज्यपाल अनुमान लगता है की किस दल का स्थायी सरकार का गठन कर सकता है, और इसके आधार पर यह निर्णय करता है की किस नेता को मंत्रिमंडल बनाने के लिए आमंत्रित जाये ,,राज्यपाल अनुमान लगाने में लिस्ट पद्धति तथा परेड पद्धति को अपनाते है,




लिस्ट पद्धति -





राज्यपाल द्वारा इस पद्धति का अनुसरण तब किया गया जब मुख्यमंत्री पद के एक से अधिक दावेदार हो ऐसी परिस्थिति में राज्यपाल दावेदार अपने समर्थको सूची पेश करने के लिए कहे और यदि किसी विधायक नाम अधिक सूचियों पाया जाता है तो राज्यपाल उस विधायक का साक्षत्कार ले सकता है ,





परेड पद्धति -





इसके अनुसार मुख्यमंत्री पद के दावेदार द्वारा समर्थको की परेड में सामर्थ्य विधायक के आधार पर मुख्यमंत्री नियुक्ति करता है,





योग्यता -





मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य होना चाहिए परन्तु यदि कोई ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनता है ,किसी भी सदन सदस्य न हो तो उसे 6 माह अंदर विधानमंडल के किसी भी सदन सदस्य बन जाना चाहिए अन्यथा उसे पद त्यागना पड़ेगा ,





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बिहार के वर्त्तमान मुख्यमंत्री कार्य एवं शक्तियाँ





मुख्यमंत्री कार्य एवं शक्तियों का विवेचना हम निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर है





मंत्रिपरिषद सन्दर्भ में





मुख्यमंत्री राज्य मंत्रिपरिषद के मुखिया रूप में निम्न शक्तियों का प्रयोग करते है ,





  1. राज्यपाल उन्ही लोगो को मंत्री नियुक्त करता है जिसकी सिफारिस मुख्यमंत्री ने की है ,
  2. वह मंत्रियो के विभागों का का वितरण एवं फेरबदल करता है ,
  3. मतभेद होने पर वह किसी भी व्यक्ति को त्यागपत्र देने के लिए कह सकता है राज्यपाल को उसे बर्खास्त करने का परामर्श दे सकता है,
  4. वह मंत्रिपरिषद के बैठक की अध्यक्षता कर फैसला को प्रभावित करता है,
  5. वह सभी मंत्रियों के क्रियाकलापों में सहयोग ,नियंत्रण निर्देश और मार्गदर्शन देता है,




राज्यपाल के सन्दर्भ में -





  1. मुख्यमंत्री राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बिच कड़ी का काम करता है और शासन समस्त निर्णयों को राज्यपाल को अवगत कराता है,
  2. वह महत्वपूर्ण अधिकारीयों जैसे -महाधिवक्ता ,राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों और राज्य निर्वाचन आयुक्त आदि के नियुक्त के सम्बन्ध में राज्यपाल को परामर्श देता है,




राज्य विधान मंडल के सम्बन्ध में





  1. वह राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाने अथवा उसे स्थगित करने के सम्बन्ध में सलाह है,
  2. वह राजयपटल पर सरकारी नीतियों को घोषणा करता है,
  3. वह राज्यपाल को किसी भी समय विधानसभा विघटित की सिफारिश कर सकता है ,




अन्य शक्तियों एवं कार्य





  1. वह राज्य योजना बोर्ड का अध्यक्ष होता है।,
  2. वह क्षेत्रीय परिषद् के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करता है,कार्यकाल ३ साल
  3. वह अंतरराज्यीय परिषद् एवं राष्ट्रीय विकास परिषद् सदस्य होता है,
  4. वह राज्य सरकार के मुख्या प्रवक्ता होता है,
  5. आपातकाल के दौरान राजनैतिक स्तर पर वह मुख्य प्रबंधक होता है,
  6. वह सेवाओं का राजनैतिक प्रमुख होता है,

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