संथाल विद्रोह के परिणाम एवं महत्व और निष्कर्ष

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संथाल विद्रोह उद्देश्य को पूरा पाया तथापि इससे महत्वपूर्ण बदलाव के प्रसस्त किये ,वैसे किसी भी आंदोलन महत्व का आंकलन महत्व उसके परिणामो के परिपेक्ष्य में बड़ी किया है इसके परिणामो निम्न है





  1. संथाल विद्रोह बहुत क्षेत्र के लिए प्रशासन विशेष पद्धति तहत भागलपुर एवं वीरभूमि के कुछ क्षेत्रो को काटकर नॉन रेगुलेशन जिले रूप में संथाल परगना का गठन किया गया जहां सामन्य कानून लागु नहीं होते थे,
  2. इस क्षेत्र में संथाल परगना टेनेन्सी एक्ट लागु किया गया ,जिसके तहत पह्ड़ा पंचायत जिसके तहत मुंडा गांव संचालित एवं नियंत्रित होते थे एवं ग्राम पंचायत को मान्यता दी गई ग्रामीण अधिकारीयों पुलिस सम्बन्धी अधिकार दिए गए
  3. संथाल क्षेत्र में सामाजिक व्यवस्था मांझी व्यवस्था को पुनः बहाल किया गया




समीक्षा एवं निष्कर्ष





कुल मिलाकर संथाल विद्रोह जनजातीय विद्रोह था जिसे संगठित करने में जनजातीय एवं धार्मिक कारकों महत्वपूर्ण भूमिका रही ,जिसमे पारस्परिक अस्त्रों तीर -धनुष ,बरछा ,भला आदि का व्यापक स्टर पर उपयोग हुआ ,जड़ी तक विस्तार क्षेत्र की बात है तो इसका दायरा संकुचित ही रहा , विद्रोह न जनजातीय आंदोलन में एक महत्वपूर्ण कड़ी है ,बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास पर भी इसका प्रभाव पड़ा इस विद्रोह से संथालों जनजातीय अधियकरों के संगरक्षण के सुनिश्चित करने के लिए उनके पारस्परिक जीवन में बाह्य हस्तक्षेप को सुनिश्चित कोशिश की गई फिर भी यह विद्रोह भारत में हुए विभिन जनजातीय आंदोलन में अपने स्वरूप के तत्वों के आधार पर न सिर्फ व्यापक रहा बल्कि कई दृश्टिकोण जनजातीय आंदोलनो के विकास निर्णायक बना ,


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