भारतीय में मूल कर्तव्य के विशेषताएं ,आलोचना ,महत्व


मूल कर्त्तव्य की विशेषताएं





निम्नलिखित बिंदुओं को मूल कर्तव्यों के विशेषताएँ के संदर्भ में उल्लेखित किया जाता सकता है,





  1. कर्तव्यों की सूचि में कुछ नैतिक कर्तव्य है तो नागरिक ,जहां स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्शों का सम्मान एक नैतिक दयितव्य है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्र गीत का सम्मान नागरिक कर्तव्य है,
  2. ये मूलतः भारतीय जीवन पद्धति के आंतरिक कर्तव्यों का वर्गीकरण है,
  3. मूल अधिकार सभी के लिया चाहे वो देश का नागरिक हो या विदेश का (कुछ अधिकार )परन्तु मौलिक कर्तव्य केवल नागरिकों के लिए




  1. कर्तव्यों की सूचि में कुछ नैतिक कर्तव्य है तो नागरिक ,जहां स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्शों का सम्मान एक नैतिक दयितव्य है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्र गीत का सम्मान नागरिक कर्तव्य है,
  2. ये मूलतः भारतीय जीवन पद्धति के आंतरिक कर्तव्यों का वर्गीकरण है,
  3. मूल अधिकार सभी के लिया चाहे वो देश का नागरिक हो या विदेश का (कुछ अधिकार )परन्तु मौलिक कर्तव्य केवल नागरिकों के लिए
  4. निदेशक तत्वों की तरह मूल कर्त्तव्य भी गैर -न्योचित है,




मूल कर्तव्यों के आलोचना





संविधान के भाग 4 क में उल्लेखित मूल कर्तव्यों की निम्नलिखित आधार पर आलोचना की जाती है





  1. कर्तव्यों की सूचि पूर्ण नहीं है,क्योंकि इनमे मतदान ,कर अदायगी परिवार नियोजन आदि का वर्णन नहीं है,
  2. कुछ कर्तव्य अस्पष्ट ,बहुअर्थी और आम व्यक्ति के लिए समझने में कठिन है, जैसे- सामाजिक ,उच्च आदर्श ,संस्कृति ,वैज्ञानिक दृष्टिकोण
  3. आलोचकों के अनुसार इसे भाग 4 में जोड़ना इसके महत्व को कम करता है उनका कहना है की अगर इसे भाग 3 के बाद जोड़ा जाता तो यह मौलिक अधिकार के बराबर रहता है ,
  4. गैर न्योतिक छवि के चलते उन्हें आलोचकों द्वारा नैतिक आदेश करार दिया गया




मूल कर्तव्य के महत्व





आलोचनाओं एवं विरोध के वावजूद मूल कर्तव्यों की विशेषताओं को निम्न दृष्टिकोण के आधार पर स्वीकार किया गया है,





  1. मूल कर्तव्यों राष्ट्र विरोधी एवं समाज विरोधी कार्यों के लिए चेतावनी के रूप काम करते है,
  2. मूल कर्तव्य नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत है,
  3. मूल कर्तव्य नागरिकों एक सभ्य समाज की संकल्पना के अवसर उपलब्ध करवाता है,
  4. मूल कर्तव्य पालन फल- स्वरूप एक ऐसे देश की संकल्पना होगी जहां हर और सभ्यता और संस्कृति ,देश की गरिमा ,अखंडता अक्षुण्य रहेगी




मूल कर्तव्य देश और समाज के विकास की तीव्रता प्रदान करने वाला है, मूल कर्तव्यों के पालन कराने के लिए लोगों को नैतिक मूल्य एवं मौलिक कर्तव्य के बारे में शिक्षित किया जाएँ तथा अनुकूल वातावरण के निर्माण किया जाये जिसमें प्रत्येक नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने और समाज एवं देश के प्रेरित अपना ऋण चुकाने में गर्व तथा बंधन का अनुभव करे ,मूल कर्तव्यों के प्रति नागरिकों को जागरूक बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था एवं जान संचार माध्यम की सहायता लेनी चाहिए ताकि नागरिक स्वतः स्फूर्त ढंग से इन कर्त्वयों का पालन करें ,इसके लिए समाज के बड़े तबकों के लोगों को जनता के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए जिसे देखकर स्वतः लोग मूल कर्त्वयों के पालन को अपना मुलभुत आवश्यकता समझे ,





इसके पश्चात ही हमें एक प्रगतिशील भारत मिल सकेगा ,





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