Saturday, 12 January 2019

संथाल विद्रोह ,विद्रोह कारण ,संथाल विद्रोह उदेश्य ,प्रकृति ,परिणाम ,महत्व ,समीक्षा एवं निष्कर्ष

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बंगाल के मुर्शिदाबाद तथा बिहार के भागलपुर जिलों में स्थानीय जमींदारों ,महाजन और और अंग्रेज कर्मचारी के अन्याय अत्याचार के शिकार संथाल जनता ने एकजुट होकर उनके विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था ,इसे संथाल या संथाल हुल कहते है,संथाली भाषा में में हल शब्द का शाब्दिक अर्थ विद्रोह होता है,





संथाल जनजाति के लोग पूर्वी बिहार के भागलपुर से राजमहल के क्षेत्र में निवास कर रहे थे ,जून 1865 में सीन्दू और कान्हू के नेतृत्व में राजमहल की पहरियों से सिरे क्षेत्र में इन्ही संगलों के द्वारा जो विद्रोह किया गया वह अबतक भारत के इतिहास में होने वाले जनजातीय विद्रोह से भिन्न और विशिष्ट था ,यह विद्रोह अपनी प्रकृति में जितना जनजातीय है, उतना ही राष्ट्रीय यह अपनी प्रकृति में जितना जनजातीय है उतना ही अध् -आधुनिक एवं उपनिवेशवाद -विरोधी ,यह आंदोलन अपने मूल रूप में जनजातीय जीवन में बहरी लोगों साथ औपनिवेशिक शासन और प्रशासन के हस्तक्षेप परिणाम है,





दरअसल यह स्थानीय जमींदारों ,माहजनों और प्लांन्ट के द्वारा शोषण विरुद्ध उठ खड़ा होने वाला आंदोलन था ,जिसे शोषक वर्ग को औपनिवेशिक सत्ता और प्रशासन के द्वारा मिलने वाले संगरक्षण में उपनिवेशवाद ,विरोधी प्रदान और महत्वपूर्ण इस संघर्ष में निचले लोग की आरक्षित हूल जो द्वारा आंदोलन की वर्गीय प्रकृति की थी





संथाल विद्रोह के प्रमुख कारण





संथाल विद्रोह के प्रमुख कारण निम्न है,





1 आर्थिक कारण ;-





संथालों के काफी परिश्रम से बंजर भूमि को उपजाऊ एवं कृषयोग्य बनाया था,झूम पद्धति के कृषि करते थे,इनका भूमि से भावनात्मक लगाव भी बन चूका था, 1790 के दशक में राजनितिक द्वारा संथाल क्षेत्र में जिस नई भूमि व्यव्श्था लागु किया ,उसमे संथालों की पारम्परिक कृषि -व्यवस्था भिन्न- भिन्न हो गई ,पहले सामूहिक लगान प्रणाली प्रावधान पर व्यक्तिगत कर स्थापित की गई ,अंग्रेजों द्वारा वसूली जानेवाली भू -राजस्व दर सामान्य दर से तिगुनी थी ,





फलतः यहाँ लोगों को साहूकार महाजनों से ऊँची दर पर कर्ज लेना पड़ता था ,कर न चूका पाने की स्थिति में उन्हें फसल भूमि से वंचित होना पड़ता था,बल्कि अच्छा प्रकार से भी शोषण होता था,संथालो को परम्परागत वनाधिकारों से भी वंचित किया गया ,जबकि संथाल लोग वन क्षेत्र को प्राकृतिक अधिकार मानते थे,अंग्रेजी शासन के प्रभाव क्षेत्र में आने के बाद वन सम्बन्धी विभिन्न कानूनों द्वारा जंगल की कटाई तथा अन्य आर्थिक गतिविधयों को प्रतिबंधित कर दिया गया ,जब कोई जब भी कोई मामला पुलिस के पास जाता था तब पुलिस द्वारा शोषित संथालों की जगह महाजन साहूकार ,जमींदार आदि का ही पक्ष लिया जाता था,





2 सामाजिक कारण ;-





ब्रिटिश प्रभाव के दौरान संथालों के धार्मिक परिवेश में भी हस्तक्षेप किया गया ,विशेषकर ईसाई मिशनरियों के माध्यम से धर्म परिवर्तन इनकी मान्यतायों पर चोट पहुंचाई गई ,





3 राजनीतिक कारण ;-





संथाल विद्रोह के लिए राजनीतिक तत्व भी उत्तरदायी थे ,संथालों शासन राजनितिक ढांचा परम पंचायत द्वारा संचालित होता था यह प्रतिनिधयों द्वारा शासन की वय्यावस्था थी,





4 तत्कालीन कारण ;-





संथाल विद्रोह के तत्कालीन कारण दरोगा हिर्दय प्रकरण माना जाता है, मामूली चोरी में दरोगा कि सहयता संथाल को गिरप्तार करना और उसका प्रतिक्रिया स्वरुप ड्रॉग्स दरोगा की हत्या की हत्या करना ,


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