अशोक ;एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

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हम जिन शेरों के चित्र रुपयों -पैसों पर देखते है,उनका एक लम्बा इतिहास है,उन्हें पत्थरों को काट कर बनाया गया और फिर उन्हें सारनाथ में एक विशाल स्तम्भ पर स्थापित किया गया था 





इतिहास के महानतम राजाओं में से एक ,अशोक के निर्देश पर इसके जैसे कई स्तभों और पत्थरों पर अभिलेख उत्कीर्ण किये गए है  ,अभिलेखों में क्या लिखा है,यह समझने की कोशिश करें की उनके राज्य को साम्राज्य क्यों कहाजाता  है ,





अशोक जिस साम्राज्य पर शासन  करते थे उसकी स्थापना उनके दादा चन्द्रगुप्त मौर्य ने लगभग 2300 साल पहले की थी ,चाणक्य या कौटिल्य नाम के एक बुद्धिजीवी ब्राह्मण ने सहयता की थी,चाणक्य लके कई विचार हमें अर्थशास्त्र नाम की किताब में मिलते है ,





वंश 





जब एक ही परिवार के कई सदस्य एक बाद एक राजा बनते हैं तो उन्हें एक ही वंश का कहा जाता है,मौर्य वंश में तीन महत्वपूर्ण राजा हुए -चन्द्रगुप्त मौर्य ,उसका बेटा बिन्दुसार और बिन्दुसार का पुत्र अशोक 





दूसरे साम्राज्य से कैसे भिन्न है 





साम्राज्य राज्यों से बड़ा होता है और उनकी रक्षा के लिए बड़ी सेनाओं की जरुरत होती है,इसलिए सम्राटो को राजाओं की तुलना में ज्यादा संसाधनो की जरुरत होती है ,इसी कारन उन्हें बड़ी संख्या में कर इकठ्ठा करने वाले अधिकारियों की जरुरत होती है ,





साम्राज्य का प्रसाशन 





मौर्य साम्राज्य बहुत बड़ा था ,इसलिए अलग-अलग  हिस्सों पर अलग-अलग ढंग से शासन किया जाता था ,पाटलिपुत्र तथा उसके आस -पास के इलाकों पर सम्राट का सीधा नियंत्रण था,संदेशवाहक एक जगह से दूसरे जगह घूमते थे और राजा के जासूस अधिकारीयों के कार्य कलापो पर नजर रखते थे ,मौर्य साम्राज्य के भीतर कई छोटे क्षेत्र या प्रान्त भी थे,तक्षशिला या उज्जैन जैसे प्रांतीय राजधानियों से शासन किया जाता था ,कुछ हद तक पाटलिपुत्र से  इनका नियंत्रण रखा जाता था और  यहां  के राजकुमारों को राज्यपाल बनाकर भेजा जाता था ,





अशोक - एक अनोखा सम्राट -





अशोक   मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे,वह ऐसे शासक हुए जिन्होंने अभिलेखों द्वारा जनता तक अपने सन्देश पहुंचाने की कोशिश किया ,अशोक का अधिक अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में है ,





कलिंग युद्ध का वर्णन करता हुआ अशोक  का अभिलेख 





अपने एक अभिलेख में अशोक ने यह बात कही है ''राजा बनने के 8 साल बाद मैंने कलिंग विजय की लगभग एक लाख 50 हजार लोग बंदी बना लिए गए ,एक लाख से ज्यादा लोग मरे गए इससे मुझे अपार दुःख हुआ,क्यों ?





जब किसी स्वतंत्र देश  को जीता जाता तो लाखो लोग मारे जाते हैं और बहुत सारे बंदी बनाये जाते है ,इसमें ब्राह्मण और श्रमन भी मारे जाते हैं ,इसलिए मुझे पश्चाताप हो रहा है,अब मैंने धम्म पालन करने एवं दुसरो को इसकी शिक्षा देने का निश्चय किया है,मैं मानता हूँ की धम्म के माध्यम से लोगों का दिल जितना बल पूर्वक विजय से ज्यादा   अच्छा है ,मैं यह अभिलेख भविष्य के लिए एक सन्देश के रूप में इसलिए उत्क्रीर्ण कर रहा हूँ की मेरे बाद मेरे बाद मेरे बेटे और पोते भीं युद्ध न करें ,





अशोक का कलिंग का युद्ध 





 कलिंग तटवर्ती ओडिश ओडिशा का प्राचीन नाम है,अशोक ने कलिंग को जितने के लिए एक युद्ध लड़ा , युद्ध जनित और  खून खराबा देखकर उन्हें युद्ध से वितृष्णा हो गई ,उन्होंने निर्णय लिया की वे भविष्य  वे कभी युद्ध  करेंगे ,





अशोक के धम्म 





अशोक के धम्म में किसी देवता की पूजा अथवा किसी कर्म कांड की बारे में नहीं है,उन्हें  लगता था की जैसे पिता अपने बच्चो को अच्छे व्यवहार की शिक्षा देते है,वैसे ही यह  कर्तव्य  था की अपनी  प्रजा  निर्देश दें,





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